रतन टाटा
रतन टाटा

34 लाख करोड़ के टाटा साम्राज्य की कमान नोएल टाटा के हाथों में, रतन टाटा के योगदान पर बोले ये बड़े शब्द

रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस नई भूमिका को लेकर नोएल टाटा ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वह टाटा समूह के संस्थापकों और रतन टाटा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत समर्पित हैं। उन्होंने इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपने सहयोगी ट्रस्टियों के प्रति आभार व्यक्त किया और अपनी जिम्मेदारी को एक सम्मान और विनम्रता का विषय बताया।

नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट के परोपकारी दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा, “टाटा ट्रस्ट एक सदी से भी अधिक समय से सामाजिक भलाई के लिए काम कर रहा है। अब समय आ गया है कि हम अपनी परोपकारी पहलों को और भी प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाएं और इसे नए स्तर पर ले जाएं।”

टाटा ट्रस्ट का बयान

टाटा ट्रस्ट ने नोएल टाटा की नियुक्ति पर एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि मुंबई में हुई एक संयुक्त बैठक में ट्रस्टियों ने रतन एन. टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया। बैठक में सर्वसम्मति से नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया, जिसकी नियुक्ति तुरंत प्रभाव से लागू हो गई।

ट्रस्ट के इस फैसले को टाटा समूह के भविष्य और उसकी सामाजिक पहलों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नोएल टाटा का परिचय:

नोएल टाटा रतन टाटा के सौतेले भाई हैं और टाटा परिवार के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वे रतन टाटा के पिता नवल टाटा और उनकी दूसरी पत्नी सिमोना डुनोयर के बेटे हैं। अपने करियर में, नोएल ने टाटा समूह के विभिन्न व्यवसायों में नेतृत्व की भूमिकाएँ निभाई हैं। वे टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास लिमिटेड और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। इसके अलावा, वे टाटा स्टील और टाइटन कंपनी के उपाध्यक्ष भी हैं। उनके व्यावसायिक कौशल और प्रबंधन अनुभव ने उन्हें टाटा समूह के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बनाया है।

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टाटा ट्रस्ट का महत्व:

भारत का सबसे बड़ा व्यावसायिक समूह टाटा समूह लगभग 34 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण के साथ वैश्विक उपस्थिति बनाए रखता है। टाटा समूह की अधिकांश होल्डिंग कंपनियों का स्वामित्व टाटा संस के पास है और टाटा संस की 66% से अधिक हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट के पास है। इसका मतलब यह है कि टाटा समूह के अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय टाटा ट्रस्ट के तहत लिए जाते हैं, जिससे ट्रस्ट को समूह के संचालन और प्रबंधन में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है।

टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में नोएल टाटा की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि उनके नेतृत्व में, टाटा ट्रस्ट टाटा समूह के परोपकारी और व्यावसायिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगा। टाटा ट्रस्ट के पास न केवल टाटा समूह की होल्डिंग्स पर नियंत्रण है, बल्कि यह भारत और दुनिया भर में कई परियोजनाओं को चलाते हुए सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए भी काम करता है।

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